1. टेस्ट सेटअप:

MEA में माउस एम्ब्रियो (आमतौर पर 1-सेल स्टेज वाले) को IVF के विभिन्न उपकरणों और सामग्रियों के संपर्क में रखा जाता है, जैसे पेट्री डिश या मीडिया।

  1. इन्क्यूबेशन:

एम्ब्रियो को इन सामग्रियों में 96 घंटों तक इन्क्यूबेट किया जाता है, जो मानव एम्ब्रियो के शुरुआती विकास चरण के बराबर होता है।

  1. विकास का मूल्यांकन:

माउस एम्ब्रियो के विकास को मॉनिटर किया जाता है और यह देखा जाता है कि कितने एम्ब्रियो ब्लास्टोसिस्ट स्टेज तक पहुंचते हैं। अगर 80% से अधिक एम्ब्रियो ब्लास्टोसिस्ट तक पहुंचते हैं, तो सामग्री को नॉन-टॉक्सिक और सुरक्षित माना जाता है।

  1. परिणाम:

यदि कोई सामग्री माउस एम्ब्रियो के विकास में बाधा डालती है या उन्हें मरने पर मजबूर करती है, तो उसे IVF प्रक्रिया के लिए अनफिट माना जाता है।

MEA क्यों आवश्यक है:

टॉक्सिसिटी का पता लगाना: यह एश्योर करता है कि सामग्री टॉक्सिक नहीं है और एम्ब्रियो के विकास में कोई दिक्कत नहीं पैदा करती।

मानव एम्ब्रियो की सुरक्षा: चूंकि माउस एम्ब्रियो और मानव एम्ब्रियो के विकास में समानताएं हैं, इस टेस्ट से यह सुनिश्चित होता है कि उपयोग किए जाने वाले उत्पाद मानव IVF प्रक्रिया के लिए सुरक्षित हैं।

गुणवत्ता नियंत्रण: यह टेस्ट IVF लैब में उपयोग किए जाने वाले सभी उत्पादों और मीडिया की गुणवत्ता को प्रमाणित करने के लिए किया जाता है।

MEA मानकों के अनुसार:

ग्रेड: IVF प्रयोगशालाओं के लिए उपयोग की जाने वाली सामग्रियां MEA-टेस्टेड होनी चाहिए। FDA और ISO मानकों में भी MEA को एक आवश्यक टेस्ट के रूप में शामिल किया गया है।

फ्रीज थॉ और लॉन्ग टर्म स्टोरेज के दौरान इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों पर भी MEA का टेस्ट किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि स्टोरेज की स्थिति भी एम्ब्रियो के विकास को प्रभावित नहीं करती।

MEA इस बात की गारंटी देता है कि IVF में उपयोग किए जाने वाले उपकरण और सामग्री एम्ब्रियो के विकास और जीवनीयता को सुरक्षित रखते हैं।

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